वोल्गा से गंगा राहुल सांकृत्यायन द्वारा पीडीएफ हिंदी में अंतिम डाउनलोड | Volga Se Ganga By Rahul Sankrityayan PDF In Hindi Final Download

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hindi pustak contactSummary of Book / बुक का सारांश 

संस्कृतियन ने अपना पहला उपन्यास जिन के लिए 1938 में लिखा था। इस बीच, 1941-42, वे भागवत शरण उपाध्याय की ऐतिहासिक कहानियों से प्रेरित थे। बाद में उन्होंने भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन में भाग लेने के लिए हजारीबाग सेंट्रल जेल में कैद रहते हुए 20 लघु कथाएँ लिखीं। यह पहली बार 1943 में प्रकाशित हुआ था और इसे आधुनिक भारतीय साहित्य की सबसे बड़ी हिंदी पुस्तकों में से एक माना जाता है।

इसका मराठी, बंगाली, अंग्रेजी, कन्नड़, तमिल, मलयालम, तेलुगु, पंजाबी सहित कई भाषाओं में अनुवाद किया गया है, जहां उन्होंने रूसी, चेक, पोलिश चीनी जैसी विदेशी भाषाओं के अलावा कई संस्करणों में भाग लिया। यह पुस्तक अब भारतीय साहित्य के इतिहास में एक क्लासिक मानी जाती है। पहला बंगाली अनुवाद 1954 में प्रकाशित हुआ था।

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Sanskritayan wrote his debut novel Jine Ke Liye in 1938. Meanwhile, 1941-42, he was inspired by the historical stories of Bhagawat Sharan Upadhyay. Later he wrote 20 short stories while imprisoned in Hazaribagh Central Jail for taking part in the Indian independence movement. It was first published in 1943 and is considered one of the greatest Hindi books of modern Indian literature.

It has been translated into many languages including Marathi, Bengali, English, Kannada, Tamil, Malayalam, Telugu, Punjabi where he ran into several editions, besides foreign languages like Russian, Czech, Polish Chinese, and many more. This book is now considered a classic in the history of Indian literature. The first Bengali translation was published in 1954.

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