प्रतापी आल्हा और उदल : स्वामी विश्वनाथ आचार्य पीडीएफ फाइनल डाउनलोड | Pratapi Alha Aur Udal : Swami Vishvanath Acharya PDF Final Download

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hindi pustak contactSummary of Book / बुक का सारांश 

बुंदेलखंड की वीर भूमि महोबा में जन्मे आल्हा और ऊदल दो भाई थे. आल्हा और ऊदल के पिता जच्छराज (जासर) और माता देवला थी. आल्हा और उदल परमार के सामंत थे और बनाफर शाखा के क्षत्रीय थे. आल्हा और ऊदल नाम के वीर योद्धाओं की वीर गाथओं का वर्णन आज भी उतर भारत के गांव -गांव में किया जाता हैं. आल्हा और ऊदल को कई वीरों के समान बताया गया हैं.

किसी प्रसिद कवि ने आल्हा को धर्मराज युधिष्ठिर और ऊदल को भीम का साक्षात अवतार बताया हैं. कही-कही पर आल्हा को धर्मराज और ऊदल को अर्जुन का रूप बताया गया हैं. दोनों भाइयों आल्हा और ऊदल का जन्‍म 12वीं विक्रमीय शताब्दी में हुआ और 13वीं शताब्दी के पूर्वार्द्ध तक दोनों वीरगति को प्राप्‍त हो गए. दोनों भाई जन्‍म से ही पराकर्मी और श्रेष्ठ थे।

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Born in the heroic land of Bundelkhand, Mahoba, Alha and Udal had two brothers. Alha and Udal’s father was Jachhraj (Jasar) and mother Devla. Alha and Udal were feudatories of Parmar and Kshatriyas of Banafar branch. The heroic gathas of the brave warriors named Alha and Udal are still described in the village of village in northern India. Alha and Udal are said to be similar to many heroes.

A famous poet has described Alha as Dharmaraja Yudhishthira and Udal as the true incarnation of Bhima. At some places, Alha has been described as Dharmaraja and Udal as Arjuna. Both the brothers Alha and Udal were born in the 12th century and by the first half of the 13th century both had attained heroism. Both brothers were brave and superior since birth.

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