हरिवंश पुराण हिंदी रूपांतर : मज्जिनसेना चरिया पीडीएफ फाइनल डाउनलोड | Harivansh Puran Hindi Rupanter : Majjinsena chariya PDF Final Download

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hindi pustak contactSummary of Book / बुक का सारांश 

रिवंश के अंतर्गत हरिवंशपर्व शैली और वृत्तांतों की दृष्टि से विष्णुपर्व और भविष्यपर्व से प्राचीन ज्ञात होता है। अश्वघोषकृत वज्रसूची में हरिवंश से अक्षरश: समानता रखनेवाले कुछ श्लोक मिलते हैं। पाश्चात्य विद्वान् वैबर ने वज्रसूची को हरिवंश का ऋणी माना है और रे चौधरी ने उनके मत का समर्थन किया। अश्वघोष का काल लगभग द्वितीय शताब्दी निश्चित है। यदि अश्वघोष का काल द्वितीय शताब्दी है तो हरिवंशपर्व का काल प्रक्षिप्त स्थलों को छोड़कर द्वितीय शताब्दी से कुछ पहले समझना चाहिए।

हरिवंश में काव्यतत्व अन्य प्राचीन पुराणों की भाँति अपनी विशेषता रखता है। रसपरिपाक और भावों की समुचित अभिव्यक्ति में यह पुराण कभी कभी उत्कृष्ट काव्यों से समानता रखता है। व्यंजनापूर्ण प्रसंग पौराणिक कवि की प्रतिभा और कल्पनाशक्ति का परिचय देते हैं।

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Under Harivamsa, Harivanshaparva is known by Vishnuparva and Bhavishyaparva in terms of style and accounts. In the Ashwaghochata Vajra list, there are some verses literally resembling Harivamsa. Western scholar Webber considered Vajralista as indebted to Harivansh and Ray Chaudhary supported his view. The period of Ashwaghosh is almost the second century. If the period of Ashwaghosha is the second century, then the period of Harivanshaparva should be understood some time before the second century, except in projected sites.

Poetry in Harivansh has its own characteristic like other ancient Puranas. In the proper expression of Rasparipaka and Bhava, this Purana sometimes resembles excellent poetry. The allegorical passages reveal the talent and imagination of the mythological poet.

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