चाणक्य नीति बाबू दीपचंद द्वारा हिंदी में पीडीएफ फाइनल डाउनलोड | Chanakya Niti By Babu Deepchand In Hindi PDF Final Download

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hindi pustak contactSummary of Book / बुक का सारांश 

चाणक्य नीति के द्वितीय अध्याय से कुछ अंश –
१. जिस प्रकार सभी पर्वतों पर मणि नहीं मिलती, सभी हाथियों के मस्तक में मोती उत्पन्न नहीं होता, सभी वनों में चंदन का वृक्ष नहीं होता, उसी प्रकार सज्जन पुरुष सभी जगहों पर नहीं मिलते हैं।

२. झूठ बोलना, उतावलापन दिखाना, दुस्साहस करना, छल-कपट करना, मूर्खतापूर्ण कार्य करना, लोभ करना, अपवित्रता और निर्दयता – ये सभी स्त्रियों के स्वाभाविक दोष हैं। चाणक्य उपर्युक्त दोषों को स्त्रियों का स्वाभाविक गुण मानते हैं। हालाँकि वर्तमान दौर की शिक्षित स्त्रियों में इन दोषों का होना सही नहीं कहा जा सकता है।

३. भोजन के लिए अच्छे पदार्थों का उपलब्ध होना, उन्हें पचाने की शक्ति का होना, सुंदर स्त्री के साथ संसर्ग के लिए कामशक्ति का होना, प्रचुर धन के साथ-साथ धन देने की इच्छा होना। ये सभी सुख मनुष्य को बहुत कठिनता से प्राप्त होते हैं।

४. चाणक्य कहते हैं कि जिस व्यक्ति का पुत्र उसके नियंत्रण में रहता है, जिसकी पत्नी आज्ञा के अनुसार आचरण करती है और जो व्यक्ति अपने कमाए धन से पूरी तरह संतुष्ट रहता है। ऐसे मनुष्य के लिए यह संसार ही स्वर्ग के समान है।

५. चाणक्य का मानना है कि वही गृहस्थी सुखी है, जिसकी संतान उनकी आज्ञा का पालन करती है। पिता का भी कर्त्तव्य है कि वह पुत्रों का पालन-पोषण अच्छी तरह से करे। इसी प्रकार ऐसे व्यक्ति को मित्र नहीं कहा जा सकता है, जिस पर विश्वास नहीं किया जा सके और ऐसी पत्नी व्यर्थ है जिससे किसी प्रकार का सुख प्राप्त न हो।

६. जो मित्र आपके सामने चिकनी-चुपड़ी बातें करता हो और पीठ पीछे आपके कार्य को बिगाड़ देता हो, उसे त्याग देने में ही भलाई है। चाणक्य कहते हैं कि वह उस बर्त्तन के समान है, जिसके ऊपर के हिस्से में दूध लगा है परंतु अंदर विष भरा हुआ होता है।

freehindipustak पर उपलब्ध इन हजारो बेहतरीन पुस्तकों से आपके कई मित्र और भाई-बहन भी लाभ ले सकते है – जरा उनको भी इस ख़जाने की ख़बर लगने दें | 

Excerpts from the second chapter of Chanakya Niti –
1. Just as gems are not found on all mountains, pearls do not grow in the heads of all elephants, sandalwood trees are not found in all forests, so gentlemen are not found everywhere.

2. Lying, showing rashness, daring, deceitful acts, foolishness, covetousness, impurity, and cruelty – all these are the natural defects of women. Chanakya considers the above defects to be natural qualities of women. However, the presence of these defects in the educated women of the present era cannot be said to be correct.

3. Having good food items, having the power to digest them, having sex power for intercourse with a beautiful woman, having a desire to give wealth along with abundant wealth. All these pleasures are attained by a man with great difficulty.

4. Chanakya says that the person whose son is under his control, whose wife behaves according to the orders, and person is completely satisfied with the money he has earned. For such a man, this world is like heaven.

5. Chanakya believes that only the householder is happy, whose children obey his orders. It is also the duty of the father to take care of the sons well. Similarly, such a person cannot be called a friend, who cannot be trusted and such a wife is useless, who does not get any kind of happiness.

6. It is better to leave a friend who talks softly in front of you and spoils your work behind your back. Chanakya says that he is like a pot, whose upper part is covered with milk, but inside is full of poison.

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